दिव्यता कदाचित खोजने से नहीं अपितु धारणीय ध्यान के संयम से प्राप्त होती है ,
उसी प्रकार दृश्य संयोगों से नहीं अपितु दृष्टा के प्रारब्ध, संस्कार एवं कर्म द्वारा जनित चित्त की वृत्तियों से प्रेरित हो जीव को सत्यता के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
महाशिवरात्रि पर मंगलकामनाएं✨