जीवन के उद्देश्यों को केवल एक ही मार्ग से प्राप्ति हेतु अभीप्सा करना, मनुष्य चेतना को संकीर्णता के दायरे में बांधने के सिवा और कुछ नहीं है।
व्यक्तित्व अनंत संभावनाओं का भंडार है उसे निष्कपट और सहज स्वरूप में पनपने देना ही आपकी संतुष्टि, सफलता, सुख एवं शान्ति का कारक होता हैं।
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