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Thursday, March 26, 2026

चित्त विवेचन ०३

तिथि: चैत्र शुक्ल अष्टमी, गुरुवार, संवत्सर रौद्र, विक्रम संवत् २०८३

जीवन में कोइ भी निर्णय इस तथ्य को ध्यान में रख लेना चाहिए कि जीवनकाल सीमित ही रहेगा और कभी भी इसका समय समाप्त हो सकता है.
तभी आप किसी भी द्वेष, लोभ, मोह और अहङ्कार से रहित हो सुखमय तथा शांतिपूर्ण आंतरिक स्थिति से पूर्ण रह पाएंगे.

व्यक्ति के संचित कर्म ही दृश्य बन उसके समक्ष अनवरत घटित होते रहते है, और प्रकृति आपसे अपेक्षा रखती है कि आप अविचलित रहकर इनको सहन करने का सामर्थ्य रखें एवम् उसके भोगों को निष्काम भाव से स्वीकारते हुए अपने प्रारब्धों का अवसान कर अमूल्य मानव जीवन काल में ही मुक्त हो लें, समय बीतने के उपरान्त मन में कोई भी गाँठ शेष नहीं रखनी चाहिए |

सन्तुलित निर्णय, निर्लिप्त होकर ही लिए जा सकते हैं;
व्यक्ति अपने जीवन में जितना निर्लिप्तता को साधता जाएगा उतना ही सुख, सम भाव तथा क्लेश मुक्त शारीर को अङ्गीकार कर सकेगा |

व्यक्तिगत उत्तरदायित्वों से आप जितना स्वयं को मुक्त करते जायेंगे उतना ही आप आवश्यकता से अधिक धन, संसाधन एवं लोभ जनित क्लेश से भी विमुख होंगे |
इससे आपको सामाजिक एवं आध्यात्मिक आयामों को आत्मसात् करने का समय भी मिलेगा तथा जीवन के अंत समय में आप निर्लिप्त भाव से मृत्यु के लिए भयमुक्त और आनंदमय होकर आगे की यात्रा संपन्न करेंगे |
प्रकृति हमें इस पथ पर अग्रसर करें यही एकमात्र ध्येय है और प्रार्थना भी ॐ卐ॐ

Wednesday, October 22, 2025

चित्त विवेचन: ०२

तिथि: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, बुधवार, संवत्सर सिद्धार्थी, विक्रम संवत् २०८२

सुख-शान्ति इसमें नहीं कि व्यक्तिवादी सोच रखते हुए आप कितनों से मार्ग में पृथक हो लिए, बल्कि वास्तविक संतोष तब प्राप्त होता है जब आप समावेशी दृष्टिकोण रखते हुए उन सभी के जीवन में कुछ सार्थकता एवम् पुष्टता प्रदान कर सके जो जितने भी दिन आपसे सानिध्य रख सका। 

स्मरण रहे जीवन के अंतिम क्षणों तक आप जितनो को जोड़ कर साथ ले चलेंगे उतना ही आप शक्ति व सामर्थ्य युक्त और संतुष्ट हो मुक्ति को अंगीकार करेंगे। 

Thursday, September 11, 2025

चित्त विवेचन

तिथि: आश्विन कृष्ण चतुर्थी, गुरूवार, संवत्सर सिद्धार्थी, विक्रम संवत् २०८२

।। प्रकृति में घटती उस झङ्कार को सुन,
चित्त में उतरते संक्रमण काल को सुन,
व्यष्टि-समष्टि में व्याप्त यज्ञों के वाक् को सुन,
हे पार्थ! यही समय है अभिनव मार्ग को चुन,
जन्मान्तरों के प्रारब्धों को कर खण्ड खण्ड,
 तू अनित्य प्रमादों के उत्सर्ग का यत्न चुन ।।

Saturday, August 16, 2025

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की मंगलकामनाएं

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, शनिवार, संवत्सर सिद्धार्थी, विक्रम संवत् २०८२ (श्री कृष्ण जन्माष्टमी)

काल का प्रादुर्भाव अनवरत मानवीय चेतना में घटित होता है, परन्तु कालातीत का प्रत्यक्ष अवतरण अति दुर्लभ व विशिष्ट संयोग से होता है।
इन युग परिवर्तनीय क्षणों में परमतत्व हमारे आंतरिक एवं बाह्य परिदृश्यों में जनित युद्धों में श्री विजय हेतु शक्ति, भक्ति एवं प्रज्ञा की पुष्टता प्रदान करें ऐसी प्रार्थना और मंगलकामना है।

Sunday, August 10, 2025

परिवार का सामाजिक महत्त्व

तिथि: भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा, रविवार, संवत्सर सिद्धार्थी, विक्रम संवत् २०८२

जब व्यक्ति धन के लोभ या अहम् के अधीन हो अपने परिजनों से संबंध तिरस्कृत करता है, तब वह जीवन के उन सभी पहलुओं के लिए अंजान लोगों पर निर्भर हो जाता है जिसे धन के द्वारा कभी प्राप्त ही नहीं किया जा सकता।
जितनी जवाबदेही, निजता का सम्मान एवं परस्पर विश्वास का भाव परिवारजनों के मध्य सुदृढ़ हो सकता है उतना अंजान जनों से सदा अप्राप्य ही रहेगा चाहे कितने भी घनिष्ठ क्यों न हों।
और जो पक्ष धन से नहीं खरीदा जा सकता, अक्सर वही आपकी और आपके धन-संसाधनों की सुरक्षा व अभिवृद्धि सुनिश्चित करते हैं।

Sunday, July 20, 2025

अभिनवस्यप्रयत्नः

 तिथि: श्रावण कृष्ण दशमी, रविवार, संवत्सर सिद्धार्थी, विक्रम संवत् २०८२


नयनों में सपने हज़ार तो क्या

दिल में उमंगे हो लाख तो क्या

यह जीवन स्वयं में अनमोल ही जान

अभिनव सृजन के मूल पहचान

जो दृष्टि यदि तू न पा सका

तो सबकुछ पाकर भी रहे कंगाल

Thursday, June 26, 2025

The Quantum Mind

तिथि: आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा, गुरुवार, संवत्सर सिद्धार्थी, विक्रम संवत् २०८२

Time is one of the most ignored yet vivid illusion that we experience owing to the potential barrier sophistically crafted by our own quantum mind. In order to transcend this potential we need to utilise this human life prudentially and raise the kinetic parameters within such that the outer physiology remains intact but freedom within is truly achieved.

It's not the body but you who have to cross this barrier of infinity.

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